Breaking News
آج کی قومی خبریں: بھارت میں سیاسی، معاشی، سماجی اور تکنیکی شعبوں میں بڑی تبدیلیاں، مکمل تفصیلی رپورٹ
बेगूसराय में बिहार पुलिस की तैयारी कर रहे युवक ने की आत्महत्या, मां के इलाज का खर्च बना चिंता की वजह
Iran Internet Toll Plan: हॉर्मुज स्ट्रेट की केबल्स पर टैक्स की तैयारी, इंटरनेट स्पीड पर असर की आशंका
समस्तीपुर में सनसनी: खानपुर में युवक का गला रेतकर कत्ल, बगीचे से मिला शव, शराब की बोतलों ने खोला राज
Bihar Bridge Safety Alert: पुल टूटा तो नहीं बचेंगे अफसर! बिहार सरकार ने इंजीनियरों को किया हाई अलर्ट
1 लाख से कम में बेस्ट गेमिंग लैपटॉप: दमदार प्रोसेसर, RTX ग्राफिक्स और हाई परफॉर्मेंस वाले टॉप ऑप्शंस
ممبئی تربوز موت معاملہ: فارنسک رپورٹ میں بڑا انکشاف، چوہا مار زہر سے ایک ہی خاندان کے 4 افراد کی موت
मोकामा विधायक अनंत सिंह पर FIR के बाद सियासत गरम, जनेऊ कार्यक्रम में डांस-हथियार विवाद पर बयान वायरल
पूर्णिया में मिड-डे मील में कीड़ा मिलने पर सख्ती, जांच में लापरवाही उजागर, निगरानी बढ़ाने के निर्देश
लॉन्च के 6 महीने में OnePlus 15 हुआ महंगा, 6,000 रुपये तक बढ़ी कीमत, जानिए नए फीचर्स और स्पेसिफिकेशन
Samastipur/Delhi: कैबिनेट विस्तार से पहले दिल्ली में तेज हलचल, सम्राट चौधरी की शाह-राजनाथ से मुलाकात
Bihar Police News: गया में लव ट्रायंगल विवाद में फायरिंग, निजी ड्राइवर ने सरकारी सिपाही को मारी गोली
नालंदा के पावापुरी में सोशल मीडिया प्रेमजाल से अपहरण और फिरौती का खुलासा, मुख्य आरोपी युवती गिरफ्तार
बिहार में पंचायत चुनाव से पहले साइबर ठगी तेज, मानदेय के नाम पर जनप्रतिनिधियों को बनाया जा रहा निशाना
Bihar Judges Transfer: पटना हाईकोर्ट की अनुशंसा पर 8 न्यायाधीशों का तबादला, कई जिलों में नई पोस्टिंग
मनु भाकर से वैभव सूर्यवंशी पर सवाल से छिड़ा विवाद, सोशल मीडिया पर क्रिकेट बनाम अन्य खेलों की बहस तेज
गया जंक्शन पर 20 दिन का मेगा ब्लॉक, राजधानी एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनों के रूट और प्लेटफॉर्म में बदलाव
बिहार में प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी, कैबिनेट विस्तार के बाद कई जिलों में नए डीएम और आईएएस तबादले तय
मधुबनी में मुकेश सहनी का बड़ा बयान, कहा—समाज के बिना ‘मलाई’ नहीं चाहिए, निषाद आरक्षण पर फिर उठी मांग
Apple MacBook Ultra: 2027 में आ सकता है नया प्रीमियम लैपटॉप, OLED और टच स्क्रीन समेत बड़े बदलाव संभव
Bihar Satellite Township: बिहार में 11 सैटेलाइट टाउनशिप की शुरुआत, जमीन मालिकों को मिलेगा 55% हिस्सा
Instagram का नया Instants ऐप लॉन्च, Snapchat को मिलेगी टक्कर—बिना फिल्टर फोटो शेयरिंग फीचर चर्चा में
काजोल ने तोड़ा 30 साल पुराना नियम, पहली बार किया ऑन-स्क्रीन किसिंग सीन—खुद बताया क्यों लिया यह फैसला
पीएम मोदी का बंगाल दौरा: कोलकाता में रोड शो के बाद हुगली नदी में नौका विहार, तस्वीरों ने खींचा ध्यान
कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर पार, अमेरिका-ईरान तनाव से बाजार धड़ाम, सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट
Bihar NH Projects Update: पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे सहित 6 बड़ी सड़क योजनाएं कैबिनेट मंजूरी में अटकी
Iran–US Diplomatic Breakthrough in Islamabad: High-Level Talks Expected Amid Tight Security Lockdown
Iran–US Diplomatic Breakthrough in Islamabad: High-Level Talks Expected Amid Tight Security Lockdown
बिहार में सैलरी-पेंशन भुगतान पर संकट, 10% कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन, करोड़ों लाभार्थी इंतजार में
जमुई में शराब तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड समेत 5 गिरफ्तार, नाबालिगों के इस्तेमाल का खुलासा
कटिहार में खेत में करंट लगने से पति-पत्नी की दर्दनाक मौत, चार बच्चों के सिर से उठा माता-पिता का साया
दरभंगा में 128 राजस्व कर्मचारी निलंबित, सामूहिक अवकाश से सरकारी काम बाधित करने पर डीएम का बड़ा एक्शन
बक्सर में सुकन्या योजना के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, 80 महिलाओं के खातों से करोड़ों का लेनदेन
Imad Mughniyeh: The Shadow Commander Behind Hezbollah’s Global Network and Modern Asymmetric Warfare
बिहार में सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण से पहले पटना में हाई अलर्ट, ट्रैफिक व्यवस्था बदली, कई रास्ते बंद
भागलपुर में शराबबंदी पर बड़ा सवाल: उत्पाद विभाग की गाड़ी से शराब बरामद, चालक नशे में हंगामा करता रहा
Bihar Airport Expansion: Survey to Be Conducted in 4 Districts, AAI Team from Delhi to Inspect Sites
बिहार के सरकारी स्कूलों में सख्त निगरानी लागू, अधिकारियों को रोज 3 स्कूलों का निरीक्षण करना अनिवार्य
पटना में RJD अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के कार्यक्रम में गरजे तेजस्वी यादव, केंद्र-राज्य सरकार पर बोला हमला
शराबबंदी पर मांझी का बड़ा बयान, बोले- पाव भर शराब वालों पर सख्ती क्यों, बड़े तस्कर कैसे बच जाते हैं?
समस्तीपुर में अपर मुख्य सचिव डॉ. एन विजयलक्ष्मी ने LPG, PNG और जनकल्याण सेवाओं का लिया विस्तृत जायजा
रोहतास में मंदिर से चांदी का गदा और कीमती सामान चोरी, ग्रामीणों में उबाल—“अब भगवान भी सुरक्षित नहीं”
आस्था, अनुशासन और प्रकृति उपासना का महापर्व: चैती छठ 22 मार्च से, चार दिनों तक गूंजेगा भक्ति का स्वर
पश्चिम चंपारण में जमीन विवाद बना खून-खराबे की वजह, पिता और भाई पर हत्या का आरोप, एक की मौत, दो गंभीर
पटना में BPSC TRE-4 नोटिफिकेशन को लेकर शिक्षक अभ्यर्थियों का महा आंदोलन, पैदल मार्च में जताई नाराजगी
बिहार में इफ्तार डिप्लोमेसी: नीतीश कुमार और चिराग पासवान की दावतें सियासी गलियारों में चर्चा का विषय
निशांत कुमार की जदयू में धमाकेदार एंट्री: जिम्मेदारी तय होने की प्रतीक्षा, पार्टी और विपक्ष में हलचल
हाजीपुर कोर्ट में सनसनी: पेशी के दौरान कैदी ने छत से पोखर में लगाई छलांग, पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा
युद्ध की आंच से रसोई तक संकट: दरभंगा में गैस सिलेंडर के लिए सुबह 4 बजे से लाइन, खाली हाथ लौट रहे लोग
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का राजनीतिक डेब्यू: राज्यसभा की राह और बिहार की राजनीति में नई पारी
भारत में अप्रैल से अनिवार्य: E20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल की नई ऑक्टेन रेटिंग, आयात पर निर्भरता घटेगी
बिहार में अब जमीन दलालों की खैर नहीं: सरकार ने हर अंचल कार्यालय में लगाए CCTV, सख्त कार्रवाई का एलान
राजद-जदयू विवाद: नीरज कुमार ने सुनील कुमार सिंह पर जमकर साधा निशाना, शराब और इलेक्ट्रॉल बांड पर घेरा
दिल्ली से लेह जा रही स्पाइसजेट की उड़ान तकनीकी खराबी के कारण वापस दिल्ली लौट आई, सभी यात्री सुरक्षित
बिहार विधानसभा में विधायक निधि बढ़ाने को लेकर हंगामा: सत्ता और विपक्ष एकजुट, सदन में देर तक नारेबाजी
बजट सत्र के 15वें दिन सदन में हंगामा: अपराध पर घिरी सरकार, जीआई टैग और छात्र योजनाओं पर भी गरमाई बहस
पीरपैंती पावर प्रोजेक्ट पर अडानी की नजर: बिहार की ऊर्जा तस्वीर बदलने वाली योजना की आज करेंगे समीक्षा
बयानबाज़ी से गरमाया बिहार—तेजस्वी यादव बनाम मैथिली ठाकुर टकराव में ‘पुराना-नया बिहार’ की बहस फिर तेज
बिहार राज्यसभा चुनाव 2026: AIMIM ने खुद का उम्मीदवार उतारने का किया ऐलान, पांचवीं सीट के समीकरण बदले
मुजफ्फरपुर: 16 वर्षीय छात्रा की गोली मारकर हत्या, आरोपी ने थाने में आत्मसमर्पण किया, इलाके में सनसनी
फुलवारी शरीफ छात्रा मौत मामला: संदिग्ध परिस्थितियों में छात्रा की मौत, हत्या या आत्महत्या की बहस तेज
पटना: तेज प्रताप यादव का बड़ा बयान, बोले- राजनीति में साजिशें आम हैं, मेरी हत्या की साजिश भी होती रही
लोकसभा स्पीकर पर घिरा विवाद: हटाने के प्रस्ताव से गरमाया बजट सत्र, जानिए क्या है संवैधानिक प्रक्रिया
सिवान में पत्रकार पर हमला: शादी से लौटते वक्त बाइक सवार बदमाशों ने फायरिंग कर किया गंभीर रूप से घायल
“होली पर बिहार आने वालों के लिए रेलवे ने चलाई स्पेशल ट्रेनें, यात्रियों के लिए तत्काल टिकट भी उपलब्ध
मुजफ्फरपुर में स्नातक छात्र पर बाइक सवार बदमाशों ने किया हमला, पेट में लगी गोली, पुलिस जांच में जुटी
बिहार बजट में महिला सशक्तिकरण का रोडमैप: गांव की इकाई से शहर के बाजार तक, ट्रेनिंग से सीधे रोजगार तक
मोदी सरकार में बिहार को रेलवे की नई ताकत:रेल बजट नौ गुना बढ़ा,हाईस्पीड कॉरिडोर से बदलेगी कनेक्टिविटी
बिहार में जमीन दस्तावेजों का डिजिटल युग:1908 से अब तक की रजिस्ट्री एक क्लिक पर,दफ्तरों के चक्कर खत्म
बजट 2026-27: ‘शी मार्ट’ से जीविका दीदियों को मिलेगा नया बाजार, बिहार बन सकता है महिला उद्यमिता का हब
कैथी लिपि के दस्तावेज अब नहीं बनेंगे सिरदर्द, सरकार ने तय किया रेट और उपलब्ध कराए प्रशिक्षित अनुवादक
समस्तीपुर जिले के अपर जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने गणतंत्र दिवस पर जिलेवासियों को दी हार्दिक शुभकामनाएं
निष्ठा, सेवा और स्मृतियों से सजी विदाई: आचार्य विजयव्रत कंठ को भावभीनी सम्मान-समारोह में दी गई विदाई
समृद्धि यात्रा का सातवां पड़ाव: मुजफ्फरपुर को 850 करोड़ की विकास सौगात देंगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़, दो साल से चल रहा था खेल
- Reporter 12
- 01 Apr, 2026
कानपुर के आहूजा हॉस्पिटल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, विदेशी महिला का भी हुआ था ऑपरेशन।
कानपुर के आहूजा हॉस्पिटल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, विदेशी महिला का भी हुआ था ऑपरेशन।
कानपुर में अवैध अंग प्रत्यारोपण के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। शहर के केशवपुरम इलाके में स्थित आहूजा हॉस्पिटल पर आरोप है कि वहां पिछले करीब दो वर्षों से बिना अधिकृत अनुमति के किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे थे। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच में यह बात सामने आई है कि अस्पताल में न सिर्फ स्थानीय बल्कि दिल्ली, मेरठ, नोएडा और एनसीआर से भी मरीजों और डोनरों को लाकर ऑपरेशन किए जाते थे। मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था, निजी अस्पतालों की निगरानी और मेडिकल नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इसी साल मार्च की शुरुआत में दक्षिण अफ्रीका की एक महिला का भी यहां कथित रूप से किडनी प्रत्यारोपण किया गया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह ऑपरेशन भी नियमों को दरकिनार कर किया गया। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की सूचनाएं काफी समय से मिल रही थीं। इसके बाद क्राइम ब्रांच, एलआईयू और खुफिया इकाइयों को सक्रिय किया गया और स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, यह स्पष्ट होता गया कि मामला किसी एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था। यह नेटवर्क मरीजों की पहचान से लेकर डोनर तलाशने, अस्पताल में भर्ती कराने, ऑपरेशन कराने और बाद में उन्हें दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने तक की पूरी व्यवस्था संभालता था। जांच में सामने आया कि इस रैकेट में जुड़े लोग बड़ी सावधानी से काम करते थे और हर स्तर पर सबूत मिटाने की कोशिश की जाती थी।
अस्पताल के पास नहीं थी ट्रांसप्लांट की अनुमति
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने स्पष्ट किया कि आहूजा हॉस्पिटल को किडनी ट्रांसप्लांट या यूरोलॉजी संबंधी जटिल सर्जरी की कोई अधिकृत अनुमति नहीं थी। अस्पताल में सामान्य नर्सिंग होम और आईसीयू जैसी सुविधाएं जरूर मौजूद थीं, लेकिन गुर्दा प्रत्यारोपण जैसी विशेष प्रक्रिया के लिए आवश्यक लाइसेंस, विशेषज्ञ टीम और संस्थागत स्वीकृति उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में यहां इस तरह के ऑपरेशन होना अपने आप में बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की पड़ताल में यह भी सामने आया कि ऑपरेशन के लिए बाहर से डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को बुलाया जाता था। सर्जरी टीम अपने साथ जरूरी उपकरण भी लेकर आती थी। अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में मौजूद दो टेबलों का इस्तेमाल प्रत्यारोपण प्रक्रिया में किया जाता था। इससे यह संकेत मिलता है कि पूरी तैयारी पहले से होती थी और ऑपरेशन सुनियोजित ढंग से कराए जाते थे।
देर रात होता था ऑपरेशन, स्टाफ को दे दी जाती थी छुट्टी
जांच का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह है कि किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया अक्सर देर रात या तड़के सुबह तीन से चार बजे के बीच कराई जाती थी। यह वह समय चुना जाता था जब अस्पताल में सामान्य गतिविधि बेहद कम होती है और अधिकतर मरीज व उनके परिजन सो रहे होते हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को मिले इनपुट के मुताबिक, जिस दिन ट्रांसप्लांट होना होता था, उस दिन अस्पताल के नियमित स्टाफ को छुट्टी दे दी जाती थी।
सर्जरी के दौरान केवल चुनिंदा लोग मौजूद रहते थे, जिनमें बाहर से आए डॉक्टर और पैरामेडिकल टीम शामिल होते थे। ऑपरेशन पूरा होने के बाद मरीज और डोनर को अलग-अलग स्थानों पर शिफ्ट कर दिया जाता था ताकि किसी को संदेह न हो। जांच में यह भी सामने आया है कि इस दौरान अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे भी बंद कर दिए जाते थे। यही वजह है कि पुलिस को अस्पताल के भीतर की सीधी वीडियो फुटेज नहीं मिल सकी।
हालांकि, आसपास लगे कैमरों और दूसरे स्थानों के फुटेज से कुछ अहम सुराग मिले हैं। जांच एजेंसियों को एंबुलेंस की आवाजाही और मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाने से जुड़ी तस्वीरें और मूवमेंट मिले हैं, जिन्हें अब साक्ष्य के तौर पर जोड़ा जा रहा है।
ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजा जाता था
जांच में यह भी सामने आया कि ऑपरेशन के बाद मरीजों और डोनरों को कानपुर के अलग-अलग नर्सिंग होम और निजी अस्पतालों में शिफ्ट किया जाता था। कुछ मामलों में उन्हें दिल्ली और नोएडा तक ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार, एक विदेशी महिला को ट्रांसप्लांट के बाद पहले शहर के एक नर्सिंग होम में रखा गया, फिर बाद में दूसरे शहरों के अस्पतालों में इलाज कराया गया।
इस पैटर्न से साफ है कि रैकेट केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं था, बल्कि पोस्ट-ऑपरेटिव केयर और मरीजों को छिपाने के लिए भी अलग-अलग ठिकानों का इस्तेमाल किया जाता था। स्वास्थ्य विभाग की टीम को कुछ ऐसे नर्सिंग होम के बारे में भी जानकारी मिली है, जहां बिना समुचित अनुमति और विशेषज्ञता के इलाज किया जा रहा था।
रिकॉर्ड में नहीं मिला ऑपरेशन का पूरा ब्योरा
मामले को और गंभीर बनाता है अस्पताल के रिकॉर्ड में गड़बड़ी। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि कथित ट्रांसप्लांट से जुड़े कई ऑपरेशन और सर्जरी का पूरा विवरण अस्पताल के दस्तावेजों में दर्ज नहीं था। यानी या तो रिकॉर्ड जानबूझकर छिपाया गया, या फिर ऐसे ऑपरेशन आधिकारिक तौर पर दिखाए ही नहीं गए।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, कुछ स्थानों पर मरीजों के इलाज के लिए केवल साधारण कागजों पर दवाओं, इंजेक्शन और ग्लूकोज जैसी चीजों का उल्लेख किया गया था। इस तरह की कच्ची और अनौपचारिक लिखावट यह दिखाती है कि इलाज को व्यवस्थित मेडिकल रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने से बचा गया।
सात ट्रांसप्लांट की जानकारी, दायरा और बढ़ सकता है
अब तक की जांच में कम से कम सात किडनी प्रत्यारोपण की जानकारी सामने आई है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि यह संख्या और भी अधिक हो सकती है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि पिछले दो वर्षों में कितने मरीज इस नेटवर्क के जरिए गुजरे और कितने डोनरों का इस्तेमाल किया गया।
जांच एजेंसियां अस्पताल के स्टाफ, उससे जुड़े बाहरी डॉक्टरों और सहयोगी नर्सिंग होम के कर्मचारियों से पूछताछ कर रही हैं। कई ऐसे नाम सामने आए हैं जो अधिकृत और अनधिकृत दोनों तरह के संस्थानों से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि यह नेटवर्क कई स्तरों पर फैला हुआ था।
शहर के सर्जन और डॉक्टर भी जांच के घेरे में
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अब उन डॉक्टरों और सर्जनों से भी पूछताछ की तैयारी में हैं, जिन्होंने कथित तौर पर ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों का इलाज किया। आरोप है कि अस्पताल के पास इस तरह के रोगियों के इलाज की भी अधिकृत अनुमति नहीं थी, इसके बावजूद कुछ डॉक्टर वहां मरीजों को देखते रहे।
सीएमओ कार्यालय का कहना है कि अस्पताल में आने वाले “ऑन कॉल” डॉक्टरों से भी पूछताछ होगी। यह भी जांचा जाएगा कि उन्हें मरीज की वास्तविक स्थिति की जानकारी थी या नहीं, और अगर थी, तो उन्होंने इसकी सूचना संबंधित विभागों को क्यों नहीं दी। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि मामले में केवल अस्पताल प्रबंधन ही नहीं, बल्कि मेडिकल नेटवर्क के दूसरे हिस्सों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
सरकारी डॉक्टरों और दलालों की भूमिका पर भी नजर
जांच के दौरान कुछ नर्सिंग होम और निजी अस्पतालों को लेकर यह भी जानकारी मिली है कि वहां सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस और दलालों की सक्रियता लंबे समय से चर्चा में थी। आरोप है कि मरीजों को बेहतर इलाज, जल्दी ऑपरेशन या विशेष सुविधा का लालच देकर निजी संस्थानों की ओर मोड़ा जाता था।
सूत्रों के मुताबिक, यह नेटवर्क खासकर ऐसे लोगों को टारगेट करता था जिन्हें पैसों की जरूरत हो या जो गंभीर किडनी बीमारी से जूझ रहे हों। डायलिसिस कराने वाले मरीजों के बारे में जानकारी जुटाकर उनकी आर्थिक स्थिति का अंदाजा लगाया जाता था। इसके बाद उन्हें प्रत्यारोपण के विकल्प के नाम पर संपर्क किया जाता था।
डोनर और मरीज की तलाश का संगठित तरीका
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, यह पूरा सिंडिकेट बेहद संगठित तरीके से काम करता था। जांच में यह भी सामने आया है कि मरीजों की जानकारी साझा करने और डोनर तलाशने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और बंद ग्रुप का इस्तेमाल किया जाता था। यानी यह कोई बिखरा हुआ स्थानीय खेल नहीं, बल्कि इंटरसिटी नेटवर्क था जो कई शहरों को जोड़कर चल रहा था।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह रैकेट मेडिकल जरूरत, आर्थिक मजबूरी और निजी अस्पतालों की कमजोर निगरानी—तीनों का फायदा उठाकर फल-फूल रहा था। अब इस पूरे मामले में शामिल डॉक्टरों, अस्पताल संचालकों, स्टाफ और बिचौलियों की भूमिका को अलग-अलग स्तर पर खंगाला जा रहा है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल
कानपुर का यह मामला सिर्फ एक अस्पताल या कुछ लोगों की करतूत भर नहीं है। यह निजी स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी, ट्रांसप्लांट जैसे संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और मेडिकल एथिक्स पर गंभीर सवाल उठाता है। यदि किसी अस्पताल के पास अनुमति नहीं थी, विशेषज्ञ नहीं थे, रिकॉर्ड अधूरे थे और फिर भी ऑपरेशन होते रहे, तो यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ भी है।
फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों ने अपनी जांच तेज कर दी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां, लाइसेंस संबंधी कार्रवाई और मेडिकल नेटवर्क से जुड़े नए खुलासे होने की संभावना है। कानपुर का यह किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट अब सिर्फ स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य तंत्र की निगरानी और जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *







